Saturday, January 24, 2009

Moving the blog

I am consolidating all my personal blogs into 
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Monday, January 12, 2009

सत्य

हरिश्चंद्र के हिंद में यह कैसे लोग आयें है,
जो ख़ुद अपने कारखाने लूट रहे हैं,
यहाँ पुजारी ही मन्दिर गिरा रहे है,
यह कैसे तूफ़ान हिंद पर आ रहे है,
ऐसे में हिंद के माजी कहाँ है?
कहाँ है वोह सत्य को जिताने वाले?
जिन्हें नाज़ है हिंद पर वोह कहाँ है?

Wednesday, January 7, 2009

पहाड़

पहाडोंसी है उम्मीद हिंद से,
की राह दिखा दे हिम्मत से,
सख्त न हो अपने दुश्मनों से,
के उनके घर न जले,
लेकिन ये घाव गहरा है,
इसको भूलना ख़ुद का अपमान,
इससे सीख के आगे बढे,
इसीमे है अपनी शान।
क्या हम इस बार सीखेंगे?
कहाँ है वोह अभिमानी नेता,
जिन्हें नाज़ है हिंद पर वोह कहाँ है?

Friday, December 12, 2008

ठंडी पड़ रही है आज़ादी की लडाई!

बदलाव के नारे ठंडे पड़ रहे है,
रोटी के चक्के से लोग पीस रहे है,
यह रोज़ के शोर में बहरे हो रहे है,
सपनो की बलि से अंधे हो रहे है,
क्या हिंद को ये सब दिखायी न देता?
यह नेता कैसे इनका भविष्य उजाड़ रहे है,
कहाँ है वोह जिन्हें क़द्र है इस जहाँ की?
जिन्हें ना है हिंद पर वोह कहाँ है?

Monday, December 8, 2008

आज़ादी की चिंगारी

बहुत एक दिन बाद एक चिंगारी जली है,
एक नए हिंद की ज़ंग-ऐ-आज़ादी चली है,
बहुत दिन बाद नया सवेरा हुआ है,
एक नए हिंद का सपना दिखा है,
आज इस चिंगारी तो बचाओ,
जिन्हें नाज़ है हिंद पर उनको बुलाओ!

Friday, December 5, 2008

साथ

सोये साथी धीमेसे जाग रहे है,
पुराने दायरे आगे बढ़ा रहे है,
तोड़ हर दायरा आगे बढ़ना है,
हिंद को आज बुलंद होना है,
यह ऊँचाई साथ साथ चढेंगे,
मिल बाँट कर - कामयाब बनेंगे,
हमारे विजय साथी यहाँ है
हमे नाज है हिंद पर हम यहाँ है!

Thursday, December 4, 2008

जागो मेरे हिंद!

यह कैसा शोर आसमांमें गूँज रहा है?
यह कैसी आवाजें उठ रही है?
यह क्यों जहाँ बसंती लग रहा है?
उठो हिंद वालों - कोई जाग रहा है!
शायद नई सुबह के गीत गा रहा है!
लग रहा है आज जीवन बदलेगा!
लग रहा है आज हिंद जाग उठेगा!